उदयपुर। जिले के गोगुन्दा थाना क्षेत्र में हाईवे से सटी 2 करोड़ से अधिक की बेशकीमती जमीन के फर्जी हक त्याग (Fake Relinquishment Deed) मामले में लिप्त आरोपी को गिरफ्तार कर बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे न्यायिक अभिरक्षा (Judicial Custody) में भेज दिया गया। आरोपी की ओर से पेश जमानत प्रार्थना पत्र (Bail Application) को भी नामंजूर कर दिया गया।

अनुसंधान अधिकारी एएसआई नन्दलाल ने बताया कि ब्राह्मणों का कलवाणा सायरा निवासी गोमती बाई पत्नी छगनलाल जोशी ने 2 जनवरी को रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में बताया गया कि जसवन्तगढ़ गोगुन्दा स्थित खातेदारी भूमि (Agricultural Land) में कुल 7.4650 हेक्टेयर में उनका 1/44 हिस्सा दर्ज है, जिस पर उनका स्वामित्व (Ownership) है।
आरोप है कि उनकी बहन दाखु बाई निवासी काछबा ने खुद को गोमती बाई बताकर 30 जुलाई 2025 को फर्जी तरीके से विक्रय पत्र (Sale Deed) तैयार कर उनके हिस्से की जमीन अशोक कुमार पुत्र प्रेमशंकर जोशी के नाम कर दी। इस साजिश में जसवन्तगढ़ निवासी विशाल जोशी और चांटियाखेड़ी निवासी सुरेश चन्द्र पालीवाल ने गवाह (Witness) के रूप में सहयोग किया।
इसी दिन षड्यंत्र के तहत बड़ी जोशियों की भागल निवासी अम्बालाल पालीवाल और देवीलाल पुत्र कालूलाल जोशी के साथ मिलकर दाखु बाई को गोमती बाई बताकर खातेदारी भूमि (Khasra Account No. 270, 8 व 9) कुल 1.1000 हेक्टेयर का हक त्याग (Relinquishment) भी निष्पादित कर दिया गया। जबकि दाखु बाई पहले ही 7 मार्च 2022 को अपना हक त्याग कर चुकी थी।
परिवाद में आरोप लगाया गया कि भूमाफिया अशोक जोशी ने अपने राजनीतिक रसूख (Political Influence) का उपयोग कर राजस्व अधिकारियों से मिलीभगत (Collusion) करते हुए प्रार्थीया को नुकसान पहुंचाने और स्वयं लाभ लेने के उद्देश्य से यह फर्जीवाड़ा किया। विक्रय पत्र में गोमती बाई उर्फ दाखु बाई दर्शाकर दस्तावेज तैयार किए गए ताकि कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
मामले में जांच कर रहे अधिकारी ने बड़ी जोशियों की भागल निवासी आरोपी देवीलाल पुत्र कालूलाल जोशी को गिरफ्तार कर बुधवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
सुनवाई के दौरान प्रार्थीया की ओर से अभियोजन अधिकारी एवं अधिवक्ता धर्मेश पालीवाल और भोपाल सिंह झाला ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि यह मामला धोखाधड़ी (Fraud) कर जमीन हड़पने से जुड़ा है, इसलिए आरोपी को राहत नहीं दी जानी चाहिए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पीठासीन अधिकारी ने आरोपी देवीलाल की जमानत अर्जी खारिज कर दी। (
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